पाठकों से निवेदन

इस ब्लोग पर तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, वास्तु व अध्यातम के क्षेत्र की जानकारी निस्वार्थ भाव से मानव मात्र के कल्याण के उद्देश्य से दी जाती है तथा मैं कोई भी फीस या चन्दा स्वीकार नहीं करता हुं तथा न हीं दक्षिणा लेकर अनुष्ठान आदि करता हुं ब्लोग पर बताये सभी उपाय आप स्वंय करेगें तो ही लाभ होगा या आपका कोई निकट संबधी निस्वार्थ भाव से आपके लिये करे तो लाभ होगा।
साईं बाबा तथा रामकृष्ण परमहंस मेरे आदर्श है तथा ब्लोग लेखक सबका मालिक एक है के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास रखकर सभी धर्मों व सभी देवी देवताओं को मानता है।इसलिये इस ब्लोग पर सभी धर्मो में बताये गये उपाय दिये जाते हैं आप भी किसी भी देवी देवता को मानते हो उपाय जिस देवी देवता का बताया जावे उसको इसी भाव से करें कि जैसे पखां,बल्ब,फ्रिज अलग अलग कार्य करते हैं परन्तु सभी चलते बिजली की शक्ति से हैं इसी प्रकार इश्वर की शक्ति से संचालित किसी भी देवी देवता की भक्ति करना उसी शाश्वत निराकार उर्जा की भक्ति ही है।आपकी राय,सुझाव व प्रश्न सीधे mckaushik00@yahoo.co.in (read 00 as zero zero) पर मेल कीये जा सकते है।

Sunday, December 1, 2013

गर्भवती होने का 100 प्रतिशत कामयाब घरेलु उपचार

पिण्डवाड़ा के आदिवासी क्षेत्र में एक झाड़ फुंक से उपचार करने वाला व्यक्ति गर्भधारण करने की इच्छुक स्त्रीयों को अजवायन पर एक मन्त्र पढकर देता था जिसे ऋतुस्त्राव के तीसरे दिन से रोज रात को आधी आधी चम्मच अजवायन भोजन के बाद लेनी होती थी इस उपचार से स्त्रियों को गर्भ रह जाता था। मैने इस उपचार का परीक्षण किया तो पाया कि वास्तव में इसमें मन्त्र का प्रभाव नहीं है जिन स्त्रियों की शारिरीक संरचना गर्भाशय आदि सामान्य होती है तथा उनके पति में भी शुक्राणु संबधि कोई दोष नहीं होता है उसके बावजुद उनको गर्भ नहीं रहता है तो इसका कारण उनमें पाये जाने वाले हार्मोन की गड़बड़ी से होता है यदि स्त्री हार्मोन का स्तर कम होता है तो शुक्राणु का अण्डाणु से मेल नहीं हो पाता है फलस्वरूप गर्भ नहीं ठहरता है। जो लोग गाय भैसं पालते हैं वो जानते हैं कि जब गाय भैसं हीट में होती है अर्थात उनमें कामवासना प्रचुर होती है तब वो अजीब आवाज निकालती है उस समय उनका नर से मेल करवाने पर उनमें गर्भ रहने की संभावना ज्यादा होती है।
यही इस अजवायन का रहस्य है रात को भोजन के बाद आधा चम्मच अजवायन लेने पर स्त्री में हार्मोन का स्तर बढ जाता है तथा लगभग दो घंटे बाद यह स्तर सबसे ज्यादा होता है उस समय संभोग होने पर स्त्री तत्काल गर्भवती हो सकती है। यह प्रयोग महिलाओं के लिये कामोतेजक भी है जिन महिलाओं में कामवासना कम हो वे भी प्रतिदिन रात के भोजन के बाद आधा चम्मच अजवायन लेवे तो उनमें कामवासना अप्रत्याशित रूप से बढ जाती है। मैने इस प्रयोग की सत्यता की परीक्षा हेतु एक अन्य स्थानीय भोपे ( मन्त्र से उपचार करने वाले को भोपा कहते हैं ) श्री नागबापजी की सहायता ली उनको कहा कि आप अजवायन पर अमुक मन्त्र पढकर गर्भधारण की इच्छुक स्त्रियों को देकर इसकी परीक्षा करें तो श्री नागबापजी ने मुझे बताया कि उन्होने जिन भी स्त्रियों को ऐसी अजवायन दी वो सभी गर्भवती हो गयी। अतः ब्लोग के पाठको से मेरा आग्रह है कि इसे अजमाकर लाभ उठाये व दवाईयों पर अनावश्यक रूपया बर्बाद करने से बचें।इस आलेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि जरूरतमंद को लाभ हो सके।
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Saturday, September 17, 2011

सारस्वत्य मन्त्र

मेरे स्वर्गीय पिता श्री हीरालाल कौशिक जो राजस्थान प्रशासनिक सेवा के एक उच्च अधिकारी थे तन्त्र मन्त्र में विशेष रूची रखते थे सौभाग्य से उनकी हस्तलिखित डायरी जिसमें काफी दुर्लभ मन्त्र लिखें हैं मेरे पास है यद्पि डायरी काफी फटी हुयी है तथा कुछ पृष्ठों की स्याही सिलन से मिट भी गयी है परन्तु उस खजाने से कुछ जनोपयोगी सामग्री में अपने ब्लोग पर डाल सकता हुं।
तो आज उसी खजाने से सारस्वत्य मन्त्र पेश है जिसका अभ्यास आने वाले शारदीय नवरात्रों से विधार्थि व प्रतियोगिता परीक्षा देने वाले कर सकते हैं।
डायरी के अनुसार इसकी केवल एक माला ( 108 जाप) प्रतिदिन करना पर्यापत है।
”ॐ ह्रीं श्रीं वद् वद् वाग्वादिनी भगवती सरस्वति मम विधां देहि देहि स्वाहा”
यहां थोड़ा उच्चारण पर स्पष्ट कर दूं कि संस्कृत में अनुस्वार का उच्चारण म हो ता है अर्थात ह्रीं का उच्चारण हीरिम व श्रीं का उच्चारण श्रीम तथा विधां का उच्चारण विधाम होगा।
यह मन्त्र कितना प्रभावी है मैने कभी उपयोग नहीं किया अतः जो पाठक उपयोग करें वो कृपया कमेंटस में बताने की कृपा करें कि उनको इससे लाभ हुआ 

Saturday, September 3, 2011

केमिकल लोचा-सांई बाबा मुझसे बोले ???? अतिंम भाग




इस आलेख के पिछले तीन भाग पढने के लिये यहां क्लिक करेंः-



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इसके पश्चात उन्होने अतिंम उपदेश के रूप में कहा कि सदैव ध्यान रखो कि आत्मविश्वास ही भगवान है इसलिये मन को कभी कमजोर मत होने दो सदैव अच्छा व सकारात्मक ही सोचो व सकारात्मक वाक्य ही मुह से बोलो , किसी की निन्दा चुगली मत करो व कभी भी दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप मत करो यदि तुम इनका ध्यान रखोगे तो मैं भी तुम्हारी सहायता कर सकुगां अपने मन को मुझ में लगाये रखकर अपने आप का कर्ता न मानकर मेरे द्वारा सौंपे गये कार्यों को करो जब तुम्हारा रोल यहां से पूरा हो जावेगा तो तुम्हें तुम्हारी निष्ठा के अनुसार अपने आप अच्छे स्थान पर पहुंचा दिया जावेगा।
मुझे बड़ा आघात लगा क्यों कि मैं तो प्रत्यक्ष चम्तकार की आशा लगा रहा था कि चुटकी बजाकर बाबा कोई आरामदायक जगह का ओर्डर बना देगें फिर मौजां ही मौजां
साथ ही निन्दा किये बगैर तो मेरी रोटी ही हजम नहीं होती मेरे दोस्त भी मेरे मुहं से नमक मिर्च लगायी हुयी निन्दाएं सुनकर ही मेरी प्रशंसा करते हैं जिनका विषय सरकार से लेकर बाबा रामदेव व अन्ना हजारे जी होते हैं या बोस की निन्दा करना सदैव आनंददायक होता ही है।
यदपि मुझे लगा कि यह सब मानसिक रोग ही है कलियुग में कोई चमत्कार की बात करना मूर्खता है फिर भी बाबा के बताये आदेशानुसार पालन करने के सिवाय कोई चारा भी नहीं था इसलिये इन ओदशों पर चलने का प्रयास करने लगा ( प्रयास शब्द ही जायज है क्यों कि यह बहुत मुश्किल आदेश हैं खासकर निन्दा वाला क्यों कि न चाहते हुए भी मैं माननीय मुख्यमंत्री से लेकर मेरे माननीय बोस व साथियों के आचरण व विचारों पर टिप्पणी करने से अपने आप को रोक नहीं पाता तथा टिप्पणी करने के बाद लगता है कि यह तो निन्दा की परिभाषा में आ रही है तो कह देता हुं सोरी सार्ईं बाबा मैं आगे से ध्यान रखूंगा।
खैर इन सबका जहां तक संभव हो सका पालन करने पर मेरे साथ क्या हुआ ये जरा गौर फरमाईयेः-


  • स्वाद के लिये न खाकर स्वास्थ्य के लिये खाने का ध्यान रखने लगा मीठा खाना कम कर दिया यदपि मुझे डायबिटीज नहीं है फिर भी मीठा कम से कम खाने लगा जिससे शरीर पूर्ण स्वस्थ हो गया।
  •  8 माह में दो करोड़ रूपये की बैंक ऋणों की वसूली भगवान ने मुझे माध्यम मान कर करवायी जिस पर राज्य सरकार ने मुझे एक लाख रूपये की नकद प्रोत्साहन राशि इनाम के तौर पर दी।
  •  असहयोग करने वाले कार्मिक कार्य व पराक्रम देखकर अपने आप भक्त हो गये।
  •  एक ठाकुर साहब जो वसूली करने वाले टी आर ए को उठाकर ले जाने की धमकी दे रहे थे चुपचाप आकर मय ब्याज सारी बकाया चुकता कर के चले गये।धन्यवाद ठाकुर साहब आप तो बहुत भले आदमी लगते हैं।
  • जो सज्जन 722 लाख रूपयों की वसूली वाले थे वो माननीय हाईकोर्ट की शरण में चले गये।
  •  ओडिट पैरे आदि तो धड़ाधड़ बंद होने लगे तब मुझे अहसास हुआ कि वास्तविक कर्ता कौन है।
  •  छोटे मोटे कार्य तो ऐसे हो गये कि मुझे कोई भार ही महसुस नहीं हो रहा था।
खैर आप जानते ही हैं कि मैं कितना डरपोक हुं इसलिये यह वैधानिक चेतावनी नोट कर लेवें कि इस कहानी के सभी तथ्य काल्पनिक है तथा वास्तविक घटनाओं से इनका कोई संबधं नहीं है यदि फिर भी किसी को वास्तविक लेगे तो संयोग मात्र है जिसके लिये मैं क्षमा चाहता हुं।



Saturday, August 20, 2011

अन्ना हजारे नहीं अन्ना करोड़े हैं।पर बाबा रामदेव कहां है???

अब मुझे लगता है जब अन्ना को हजारों लोग जानते थे तब वो अन्ना हजारे थे आज तो करोड़ों लोग उनके साथ हैं तो उनको अपना नाम अन्ना हजारे से अन्ना करोड़े कर लेना चाहिये। मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा है कि हमेंशा भगतसिंह व चन्द्रशेखर आजाद की तरह बलिदान के गाने बजाने वाले व देश के लिये बलिदान होने की चीख चीख कर बात करने वाले बाबा रामदेव को जब बलिदान देने का समय आया तो वो मंच से कुदकर भाग लिये।


दुसरी बार बलिदान देने का समय आया तो उन्होने जूस पीकर अनशन ही समाप्त कर दिया ( क्षमा करना बाबा रामदेव जी मैं आपका विरोधी नहीं भारत स्वाभिमान का सदस्य हुं तथा केवल मेरे मन में आयी शंका को ही व्यक्त कर रहा हुं आपकी देशभक्ति असदिंग्ध है)


अब फिर मौका आया तो स्वामी जी हरिद्वार में मोर्चा निकाल रहें है यह उसी प्रकार है कि मैं मेरे घर के एक कमरे से दुसरे कमरे तक अपने बोस के खिलाफ मोर्चा निकालूं ।


बाबा जी जब से आप पर साढेसाती आयी है। ( यह मजाक नहीं है तुला राशि पर वास्तव में साढे साती चल रही है) आपको पता नहीं क्या हो गया है।


पाठक क्या कमेंटस करके मुझे समझाएगें कि बाबा रामदेव खुलकर अन्ना करोड़े ( जल्द ही अन्ना अरबे) जी के साथ क्यों नहीं आते??????

Saturday, July 23, 2011

केमिकल लोचा-सांई बाबा मुझसे बोले ???? पार्ट तृतीय

अपनी बात को आगे बढाते हुये वे बोले कि तुं व्यर्थ ही ग्रन्थों व मेरे उपदेशों का अध्ययन करता है क्यों कि तुं उनको व्यवहार में नहीं लाता याद कर मेरे गुरू तो मेरे को रस्सी से बांध कर कुंए में उलटा लटका कर कहीं चले गये थें काफी समय बाद आकर उन्होने पुछा कि में कैसा अनुभव कर रहा था उस समय मेरा प्रत्युतर था कि मैं असीम आनंद की अनुभुति कर रहा था मेरा यह प्रत्युतर झूठ नहीं था वास्तव में मुझे मेरे गुरू की कृपा व शक्तियों पर पूर्ण विश्वास था मैं जानता था इसमें मेरा कोई हित है इसलिये मुझे बड़ा आनंद आ रहा था परन्तु तुझे तो मैने रस्सी से बांधकर कुंए में उल्टा नहीं लटकाया है फिर चीख पुकार क्यों ?
अबके मेरे पास कोई जबाब नहीं था।


उन्होने अपनी बात आगे बढायी वे बोले तुं हमेशा कहा करता था मैने इतने ओडिट आक्षेप निरस्त करवाये मैने इतनी वसूली करवायी मैने ये किया वो किया तेरी इस आत्मप्रशंसा को सुनकर मैं बहुत प्रसन्न हो गया तथा मैने सोचा तेरे जैसे होशियार आदमी की तो इस कार्यालय में सख्त आवश्यकता है पर यहां आते ही तेरा वो पराक्रम तेरी वो होशियारी कहां चली गयी समझ में नहीं आता।
स्थितप्रज्ञ होकर पराक्रम दिखा वरना व्यर्थ चीख पुकार मत मचा मेरी फोटो के आगे बैठ कर घंटी बजाना भक्ति नहीं है मेरे द्वारा समय समय पर सौंपे गये कार्यों को पूरी निष्ठा व पराक्रम से करना ही भक्ति है।


क्रमशः......शेष अगले अंक में।