पाठकों से निवेदन

इस ब्लोग पर तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, वास्तु व अध्यातम के क्षेत्र की जानकारी निस्वार्थ भाव से मानव मात्र के कल्याण के उद्देश्य से दी जाती है तथा मैं कोई भी फीस या चन्दा स्वीकार नहीं करता हुं तथा न हीं दक्षिणा लेकर अनुष्ठान आदि करता हुं ब्लोग पर बताये सभी उपाय आप स्वंय करेगें तो ही लाभ होगा या आपका कोई निकट संबधी निस्वार्थ भाव से आपके लिये करे तो लाभ होगा।
साईं बाबा तथा रामकृष्ण परमहंस मेरे आदर्श है तथा ब्लोग लेखक सबका मालिक एक है के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास रखकर सभी धर्मों व सभी देवी देवताओं को मानता है।इसलिये इस ब्लोग पर सभी धर्मो में बताये गये उपाय दिये जाते हैं आप भी किसी भी देवी देवता को मानते हो उपाय जिस देवी देवता का बताया जावे उसको इसी भाव से करें कि जैसे पखां,बल्ब,फ्रिज अलग अलग कार्य करते हैं परन्तु सभी चलते बिजली की शक्ति से हैं इसी प्रकार इश्वर की शक्ति से संचालित किसी भी देवी देवता की भक्ति करना उसी शाश्वत निराकार उर्जा की भक्ति ही है।आपकी राय,सुझाव व प्रश्न सीधे mckaushik00@yahoo.co.in (read 00 as zero zero) पर मेल कीये जा सकते है।

Thursday, January 21, 2016

लाल किताब से स्वंय जाने अपना भविष्य भाग 1 Learn Lal Kitab Astrology in Hindi Part 1


लाल किताब ज्योतिष की एक अनमोल पुस्तक है।इस पुस्तक को फगवाड़ा के किसी श्री रूपचंद जोशी पंडित ने उर्दुभाषा में लिखा था आजकल कतिपय टीवी प्रोग्रामों में लाल किताब के नाम पर जो कुछ बेचा जा रहा है उसके बारे में मैं ज्यादा तो नहीं जानता परन्तु उनका फ्री सैम्पल मैने ओनलाईन अपनी जन्मपत्रिका का बनवाया तो मैं कह सकता हुं कि उसका लाल किताब से कोई दुर दुर तक का वास्ता नहीं है तथा इसकी अत्यधिक मंहगी किमत को देखकर मैने निर्णय लिया है कि मैं धीरे धीरे श्रखंलाबद्व लाल किताब की ज्योतिष का अनमोल ज्ञान आप तक पहुंचा कर जनसाधारण को इस विषय में पारंगत कर सकता हुं ताकि वो अपनी ज्योतिष लाल किताब की सहायता से स्ंवय जानकर आर्थिक रूप से सुरक्षित रहते हुये अपनी जीवन यात्रा को सुगम बना सके।
नास्तिक व्यक्ति भी कृपया अपनी जन्म पत्रिका का लाल किताब से अध्ययन अवश्य करें ताकि उनको पता चल सके कि इस संसार में आपके साथ जो कुछ भी हो रहा है वो ईश्वर की अदभुत व्यवस्था से हो रहा है तथा आप इस व्यवस्था को बदल तो नहीं सकते परन्तु सजग रहकर बहुत कुछ अपने बचाव में भी  कर सकते हैं।
तो आईये ज्यादा विस्तार न करके आपको सीखायें कि आप कैसे इस विधा से ज्योतिष में  पारंगत बन सकते हैं।
पहले किसी भी कम्प्यूटर सोफटवेयर से या ओनलाईन अपनी जन्म पत्रिका बनावें।
अब उसमें लग्न कुण्डली देखें।
लग्न कुण्डली इस प्रकार दिखायी देगी।

अब इस लग्न कुण्डली में जहां मैने पहला खाना लिखा है उस खाने में आपके कौनसा ग्रह स्थित है वो इस ब्लोग पोस्ट के कमेंट में लिखें।
अगले भागों में मैं इस ब्लोग पोस्ट में आये कमेंटों के वरियता क्रम से यह प्रकाशित करूंगा कि लाल किताब के अनुसार आपके पहले खाने में स्थित ग्रह का क्या फलादेश होता है।
कृपया कमेंट में अपनी जन्म तारिख जन्म स्थान समय आदि नहीं लिखें केवल आपके पहले खाने में कौनसा ग्रह है उसका नाम ही लिखें आपके पहले खाने में ग्रह एक से ज्यादा हो तो भी लिखें उनका फलादेश भी अलग अलग व एक साथ होने का क्या अर्थ है आगामी पोस्टों में बताया जावेगा।
कृपया ध्यान रखें जहां मैने पहला खाना लिखा है उसी जगह को पहला खाना मानकर वहां का ग्रह ही बताना है भले ही आपकी जन्म पत्री में उस जगह पर 11, 5,6, या कोई भी नम्बर लिखा हो जैसे निम्न लग्न कुण्डली देखें यहां उस जगह पर 11 व केतु ग्रह लिखा है तो इसका अर्थ यही है पहले खाने में केतु है।

अगला भाग कुछ ही दिनों बाद प्रकाशित होगा....

Saturday, December 19, 2015

ईश्वास्यमिदं सर्वम । आओ प्रेम के प्रयोग से बीमारियों पर विजय पायें।

आज मैं आपको बताउंगा की कैसे आप अपने बचपन में लोट सकते हैं जब आप बच्चे थे तो आपको वो कोई बीमारी नहीं थी जो आज है। क्या आपने किसी बच्चे के ब्लड प्रैशर सुना है? पहले बच्चों के शुगर भी नहीं होती थी परन्तु आजकल होती है उसकी वजह डोक्टरों द्वारा बच्चों पर पीपीआई ( प्रोटोन पम्प इन्हीबेटर ) का रेगुलर उपयोग करना मैं मानता हुं यह मेरे अगले आलेख में मैं आपको बताउंगा कि कैसे आपके चिकित्सक आपको मधुमेह व घुटनों का दर्द मुफत दे रहें हैं।
आज का मूल विषय यह है कि हम बच्चे थे तो हमें डीप्रेशन क्यों नहीं था? हमें रात को नीदं की गोली खाये बगैर नींद क्यों आती थी? हम इतने खुश व उत्साहित क्यों रहते थे? हमें कुछ भी खा लेने पर एसिडीटी क्यों नहीं होती थी? हमें थायराईड व डायबिटीज क्यों नहीं थी?
दरअसल आज की इन सभी समस्याओं का राज यर्जुवेद के 40 वे अध्याय में छुपा है जिसे ईशोपनिषद कहा जाता है यदि आप साईं बाबा को मानते हैं तो आपने सांई सत्तचरित्र का अध्ययन किया होगा उसमें भी ईशोपनिषद की शिक्षाओं का सांई बाबा भी उपदेश करते थे इसके बारे में बताया गया है।
यर्जुवेद के 40 वें अध्याय का पहला श्लोक है
ईश्वास्यमिदं सर्वम
अर्थात सभी वस्तुएं ईश्वर से ओतप्रोत है ओर हमें सभी प्राणियों में ईश्वर का दर्शन करना चाहिये जैसे छोटे बच्चे करते हैं। आप फिर चौंक गये होगें कि छोटे बच्चे सभी प्राणियों में ईश्वर का र्दशन कहां करते हैं? इसका अर्थ है छोटे बच्चे जातिवाद धर्म मत सम्प्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करते छोटा बच्चा कुते के पास भी खेलने चला जाता है वो कुते को देखकर भी आत्मियता से हंसता है उसकी आाखों में देखो आप किसी छोटे बच्चे को पुचकारों वो आप की तरफ भी उसी प्रेम व आत्मियता से देखने लगेगा वो नहीं सोचता कि आपकि जाति क्या है आप किस धर्म मत पंथ को मानते हैं वो नहीं देखता कि आप पद में उससे बड़े हैं या छोटे वो नहीं देखता कि आप उसके क्या लगते हैं?
आप इन सब बातों को नहीं मानते क्यों कि ये विज्ञान का युग है आपको ऐसे उपदेश अच्छे नहीं लगते व बकवास लगते हैं चलो इसकी एक प्रयोग द्वारा पुष्टि करें क्यों कि मैं भी विज्ञान का विर्धाथी हुं तथा विज्ञान को मानता हुं इसलिये एक प्रयोग करते हैं
कल सिर्फ एक दिन जब आप सोकर उठें तब से लेकर शाम को सोने जाने से पूर्व मन में इस वाक्य को याद रखें कि
ईश्वास्यमिदं सर्वम
इस एक दिन आप सभी को अपना माने सभी से प्रेम से रहें सभी में अपने इष्ट देवता या भगवान के दर्शन करें सभी से हंसकर बात करें किसी की बुराई दिल से न करें मुंह से निकल जावे तो कोई बात नहीं एकदिन अखबार नहीं पढें इस एक दिन टीवी पर न्यूज चैनल नहीं देखें क्यों कि नकारात्मक खबरों से आप यह भुल जावेगें कि ईश्वास्यमिदं सर्वम व आप भी बुराईयां करके अपना दिल जलाने लगेगें व अपने खुद के हार्मोन बिगाड़ लेगें।
एक दिन आप ऐसी जिंदगी जी लेगें तो मुझे बताने कि जरूरत नहीं की आपके साथ कितने चम्तकार होगें यह आप प्रयोग करने के बाद कमेंट में स्वंय बतावेंगें तो ज्यादा अच्छा लगेगा।
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Thursday, July 23, 2015

हनुमान जी के विवाह का रहस्य (Mystery of Hanuman Ji Suvarchala Ji Marriage)


इन दिनों सोशल मीडीया पर हनुमान जी की उनकी पत्नी के साथ फोटो शेयर की जा रही है । परन्तु लोग समझ नहीं पा रहे की ब्रहमचारी हनुमान जी के साथ ये पत्नी जी कहां से आ गयी। 

नयी पीढी के लोग हिन्दु शास्त्र पढते ही नहीं धारावाहिकों से जो अधकचरा ज्ञान मिलता है उसे ही लेकर चलते हैं। इसलिये भगवान से प्रेम करने की जगह उनसे डरते हैं। 
तो आईये हम जानते हैं हनुमान जी के विववाह का रहस्य (Mystery of Hanuman Ji Suvarchala Ji Marriage) संकटमोचन हनुमान के बृहमचारी रूप से सारे परिचित हैं । उनहें बाल बृहमचारी भी कहा जाता हैं। लेकिन आपने कभी यह सुना हैं कि हनुमान जी का विवाह हुआ था?  उनका और उनकी पत्नी के साथ मंदिर भी हैं । ( Hanuman ji Temple with Wife)जिनके दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं । कहा तो यह भी जाता हैं कि हनुमान जी और उनकी पत्नी के दर्शन करने के बाद पति और पत्नी के बीच चल रहा तनाव समाप्त हो जाते हैं।  
आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले में हनुमान जी का मंदिर काफी मायनों में खास हैं । खास इसलिए कि हनुमान जी अपने बृहमचारी रूप में नही बल्कि गृहस्थ रूप में अपनी पत्नी सुवरचला के साथ विराजमान है।
हनुमान जी के सभी भक्त यह मानते आये हैं कि वह बाल बृहमचारी थे और बालमीकि,करभ, सहित किसी भी रामायण और रामचरित मानस में उनके बृहमचारी के रूप का वर्णन मिलता हैं लेकिन पराशर संहिता में उन विवाह का उल्लेख हैं ( Parasher Shanhita give first evidence of Hanuman ji marriage) इसका प्रमाण आंध्र प्रदेश में खम्मम जिले में बना मंदिर हैं।(suvarchla Hanuman ji temple of Telangana Khamam district) यह मंदिर याद दिलाता हैं कि रामदूत के इस चरित्र का जब उन्हें विवाह के बंधन में बंधना पड़ा था ।
हनुमान जी ने सूर्य देव को अपना गुरू बनाया था । सूर्य देव उन्हें तरह-तरह की विधाओ का ज्ञान देते। लेकिन हनुमान जी को ज्ञान देते समय संकट खड़ा हो गया । कुल नौ तरह की विधा में से पाँच तरह की विधा तो सिखा दी लेकिन चार तरह की विधा और ज्ञान ऐसे थे कि वह केवल किसी विवाहित को ही सिखाये जा सकते थे । 
हनुमान जी पूरी शिक्षा का प्रण ले चुके थे और इससे कम वह सिखने को राजी न थे। इधर भगवान सूर्य के सामने संकट था वह धर्म के अनुशासन के कारण किसी अविवाहित को कुछ विशेष विधा नही सिखा सकते थे ऐसी सिथति में भगवान सूर्य देव ने सलाह दी और अपने प्रण को पूरा करने के लिए वह मान गए । लेकिन हनुमान जी के लिये दुल्हन कौन हो और कहा से वह मिलेगी इसे लेकर सभी चिंतित थे । तब सूर्य देव ने राह दिखलाई । 
तब सूर्य देव ने अपनी परम तपस्वी और तेजस्वी पुत्री सुवरचला को हनुमान जी के साथ विवाह के लिए तैयार कर लिया। उसके बाद हनुमान जी ने अपनी शिक्षा पूरी की । सुवरचला सदा के लिये तपस्या में रत हो गई। 


इस तरह भले ही हनुमान जी शादी के बंधन में बंध गए हो ।लेकिन वह शारीरिक रूप से आज भी बृहमचारी ही हैं। पराशर संहिता में तो लिखा हैं कि सूर्य देव इस विवाह पर यह कहा हैं कि यह विवाह बृहमाणड के कलयाण के लिए हुआ है
Who was suvarchla?
Suvarchla was daughter of sun an wife of Hanuman ji
Who was guru of hanuman ji
Sun 

 महेश चन्द्र कौशिक पिण्डवाडा www.hindidugdugi.blogspot.in

Saturday, May 23, 2015

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु प्रभावशाली दीपक साधना का रहस्य।


क्या आप दीपावली ( Dipawali) को दीपक जलाने का रहस्य जानते हैं?


क्या आप जानते हैं कि दीपावली को लक्ष्मी प्राप्ति व ऋण मुक्ति से क्यों जोडा गया है क्या आप दीपावली मनाते हैं उसके बाद भी आप अगली दीपावली तक लक्ष्मीवान नहीं बन पाते? 
तो यह आलेख आपके लिये है। 
दरअसल दीपावली अमावस्या के दिन आती है जो शनि का दिन होता है हमारे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह की उच्च स्थिती व उनकी कृपा से ही मनुष्य धनवान होता है व मकान बनवा पाता है।इसलिये दीपावली को जो तिल के तेल के दीपक जलाने का रिवाज है वो तेल अमावस्या होने से शनि ग्रह की दशा ठीक करने के लिये जलाया जाता है। 
क्या आप दीपावली को मोमबतियां जलाते हैं? 
दीपावली को सरसों के तेल के दीपक जलाते हैं? 
 सिर्फ इलैक्ट्रोनिक लाईटें लगाते हैं सोचते हैं दीपकों के झंझट में कौन पड़े?
 तो आप गलत कर रहें हैं दीपावली को कम से कम सवा लीटर तिल के तेल के दीपक जलाने से मनुष्य पर चल रही शनि की दशा उतर जाती है तथा वो धनवान व ऋणमुक्त बनता है उसे व्यापार धन्धे में फायदा होता है घर में फिजुलखर्च नहीं होते।  ( Shani shadna to attract money and wealth)
चलिये अबके दीपावली को कम से कम सवा लिटर तिल्ली का तेल ( Sesame Oil) जलावें तथा यदि आप सोच रहें है दीपावली तो बहुत दुर है तो दीपावली के स्थान पर आप किसी भी अमावस्या को तिल के तेल के पांच दीपक जला कर घर की छत पर रख सकते हैं यदि आप यह प्रयोग दीपावली के अलावा अन्य अमावस्या को कर रहें हैं तो सवा लिटर तिल के तेल के दीपक एक साथ जलाना अनिवार्य नहीं है आप पांच दीपक जला सकते हैं उससे भी लाभ होगा।
 तथा कृपया यह भी ध्यान रखें कि सवा लीटर तेल की शर्त न्यूनतम है आप अपनी आस्था व हैसियत के अनुसार जितना ज्यादा तिल के तेल के दिये जलावेगें उतना ही आपको लाभ पहुंचेगा शनि भगवान पर तेल चढाने का भी यहि रहस्य है आप शनिवार को भी तिल के तेल का दीपक (जलाकर) अपने घर के बाहर शनि भगवान के नाम का रख सकते हैं उस दीपक पर सिदुंर का तिलक लगाना ओर भी अच्छा रहता है।( Burn Sesame Oil Deepak With Sindur Marking on Deepak at Every Saturday for Shani Kripa)
 कृपया इस जानकारी को शेयर करके अपने ज्यादा से ज्यादा मित्रों तक आने वाली दीपावली तक पहुंचावें।
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Saturday, June 28, 2014

कब्ज निवारण हेतु इसबगोल का प्रभावशाली तरीके से उपयोग कैसे करें। How to use psyllium husk for management of chronic idiopathic constipation

इसबगोल का छिलका विश्व की सर्वश्रेष्ठ हानिरहित कब्ज निवारक दवा है परन्तु मेरे बहुत से मित्र अनावश्यक रूप से सनाय की दवाईयां या मैग्नीशियम युक्त एैलोपेथिक दवाईयां खा खाकर या तो बवासीर से परेशान रहते हैं या अपनी आांते खराब कर लेते हैं। 
 जब मैं उन्हे इसबगोल का छिलका लेने की सलाह देता हुं तो वो कहते हैं कि इससे उन्हे कोई फायदा नहीं है उन्हे तो तेज सनाय वाली दवा खाने या एैलोपेथिक मिल्क ओफ मैग्नेशिया पीने पर ही पेट साफ होता है। चलिये आज आपको कब्ज निवारण की हानिरहित विधि बताते हैं इससे बवासीर व कब्ज के रोगियों को अपार लाभ होगा।
इसी ब्लोग पर मैने बवासीर का मन्त्र भी बताया हुआ है जिनको बवासीर की ज्यादा प्रोब्लम है वो ये मन्त्र भी करें। यदि आपको इसबगोल लेने से ज्यादा कब्ज हो जाती है या इसबगोल का छिलका आपको लगता है कि आपके कोई फायदा ही नहीं कर रहा तो इसमें आपका ही दोष है क्यों कि आप उसे लेने की सही विधि नहीं जानते हैं जबकि भारत से करोड़ो रूपयों का ये छिलका विदेशों को निर्यात होता है तथा अग्रेंज बेवकुुफ नहीं है कि वो भारत का ये छिलका करोड़ों रूपयों में मंगवाकर खा रहें हैं। 
दरअसल इसबगोल की सही खुराक रात्रि के भोजन के बाद दो पुरे चाय के चम्मच दो गिलास पानी के साथ है। जो दो चम्म्च इसबगोल का छिलका भोजन के बाद पुरे दो गिलास पानी के साथ लेता है उसको तो वो फायदा करता है बाकी में ज्यादा कब्ज करता है। 
आपसे यदि 2 गिलास ( लगभग 500 मिली ) पानी एक साथ नहीं पिया जाता तो कोई बात नहीं पहले एक चम्मच एक गिलास पानी के साथ लेवें उसके 1 घंटे बाद दुसरा चम्मच दुसरे गिलास पानी के साथ लेवें इसके साथ ही आप दुसरी कोई तेज कब्जनिवारक दवा लेते हों तो वो भी आधी मात्रा में पहले दो तीन तक लेवें बाद के दो दिन चौथाई मात्रा में लेवें। 
लगातार पांच दिन तक दो दो चम्मच इसबगोल दो दो गिलास पानी के साथ लिया जाने पर वो अपना असली प्रभाव दिखाने लगता है उसके बाद आपको लगता है कि आपके कभी कब्ज थी ही नहीं ।
उक्त उपाय आजमाने से पहले कृपया अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक या डोक्टर से सलाह अवश्य करें क्यों कि लेखक डॉक्टर नहीं है तथा आपको अन्य कोई बीमारी आंतों में रूकावट सूजन आदि हो तो इस उपाय का प्रयोग डॉक्टर से पुछकर ही करें। 
उपाय के परिणाम से 5 दिन उपयोग करने के बाद ( कृपया 1 दिन में ही निष्कर्ष नही निकाले 5 दिन लगातार उपयोग के बाद ही प्रभावी परिणाम दिखता है) कमेंटस में अवश्य अवगत करावें ताकि अन्य पाठकों का विश्वास बने।लाईक ओर शेयर तो आप करेंगें ही उसके लिये कहने की जरूरत ही नहीं है।
psyllium husk for management of chronic idiopathic constipation

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