पाठकों से निवेदन

इस ब्लोग पर तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, वास्तु व अध्यातम के क्षेत्र की जानकारी निस्वार्थ भाव से मानव मात्र के कल्याण के उद्देश्य से दी जाती है तथा मैं कोई भी फीस या चन्दा स्वीकार नहीं करता हुं तथा न हीं दक्षिणा लेकर अनुष्ठान आदि करता हुं ब्लोग पर बताये सभी उपाय आप स्वंय करेगें तो ही लाभ होगा या आपका कोई निकट संबधी निस्वार्थ भाव से आपके लिये करे तो लाभ होगा।
साईं बाबा तथा रामकृष्ण परमहंस मेरे आदर्श है तथा ब्लोग लेखक सबका मालिक एक है के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास रखकर सभी धर्मों व सभी देवी देवताओं को मानता है।इसलिये इस ब्लोग पर सभी धर्मो में बताये गये उपाय दिये जाते हैं आप भी किसी भी देवी देवता को मानते हो उपाय जिस देवी देवता का बताया जावे उसको इसी भाव से करें कि जैसे पखां,बल्ब,फ्रिज अलग अलग कार्य करते हैं परन्तु सभी चलते बिजली की शक्ति से हैं इसी प्रकार इश्वर की शक्ति से संचालित किसी भी देवी देवता की भक्ति करना उसी शाश्वत निराकार उर्जा की भक्ति ही है।आपकी राय,सुझाव व प्रश्न सीधे mckaushik00@yahoo.co.in (read 00 as zero zero) पर मेल कीये जा सकते है।

Thursday, July 23, 2015

हनुमान जी के विवाह का रहस्य (Mystery of Hanuman Ji Suvarchala Ji Marriage)


इन दिनों सोशल मीडीया पर हनुमान जी की उनकी पत्नी के साथ फोटो शेयर की जा रही है । परन्तु लोग समझ नहीं पा रहे की ब्रहमचारी हनुमान जी के साथ ये पत्नी जी कहां से आ गयी। 

नयी पीढी के लोग हिन्दु शास्त्र पढते ही नहीं धारावाहिकों से जो अधकचरा ज्ञान मिलता है उसे ही लेकर चलते हैं। इसलिये भगवान से प्रेम करने की जगह उनसे डरते हैं। 
तो आईये हम जानते हैं हनुमान जी के विववाह का रहस्य (Mystery of Hanuman Ji Suvarchala Ji Marriage) संकटमोचन हनुमान के बृहमचारी रूप से सारे परिचित हैं । उनहें बाल बृहमचारी भी कहा जाता हैं। लेकिन आपने कभी यह सुना हैं कि हनुमान जी का विवाह हुआ था?  उनका और उनकी पत्नी के साथ मंदिर भी हैं । ( Hanuman ji Temple with Wife)जिनके दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं । कहा तो यह भी जाता हैं कि हनुमान जी और उनकी पत्नी के दर्शन करने के बाद पति और पत्नी के बीच चल रहा तनाव समाप्त हो जाते हैं।  
आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले में हनुमान जी का मंदिर काफी मायनों में खास हैं । खास इसलिए कि हनुमान जी अपने बृहमचारी रूप में नही बल्कि गृहस्थ रूप में अपनी पत्नी सुवरचला के साथ विराजमान है।
हनुमान जी के सभी भक्त यह मानते आये हैं कि वह बाल बृहमचारी थे और बालमीकि,करभ, सहित किसी भी रामायण और रामचरित मानस में उनके बृहमचारी के रूप का वर्णन मिलता हैं लेकिन पराशर संहिता में उन विवाह का उल्लेख हैं ( Parasher Shanhita give first evidence of Hanuman ji marriage) इसका प्रमाण आंध्र प्रदेश में खम्मम जिले में बना मंदिर हैं।(suvarchla Hanuman ji temple of Telangana Khamam district) यह मंदिर याद दिलाता हैं कि रामदूत के इस चरित्र का जब उन्हें विवाह के बंधन में बंधना पड़ा था ।
हनुमान जी ने सूर्य देव को अपना गुरू बनाया था । सूर्य देव उन्हें तरह-तरह की विधाओ का ज्ञान देते। लेकिन हनुमान जी को ज्ञान देते समय संकट खड़ा हो गया । कुल नौ तरह की विधा में से पाँच तरह की विधा तो सिखा दी लेकिन चार तरह की विधा और ज्ञान ऐसे थे कि वह केवल किसी विवाहित को ही सिखाये जा सकते थे । 
हनुमान जी पूरी शिक्षा का प्रण ले चुके थे और इससे कम वह सिखने को राजी न थे। इधर भगवान सूर्य के सामने संकट था वह धर्म के अनुशासन के कारण किसी अविवाहित को कुछ विशेष विधा नही सिखा सकते थे ऐसी सिथति में भगवान सूर्य देव ने सलाह दी और अपने प्रण को पूरा करने के लिए वह मान गए । लेकिन हनुमान जी के लिये दुल्हन कौन हो और कहा से वह मिलेगी इसे लेकर सभी चिंतित थे । तब सूर्य देव ने राह दिखलाई । 
तब सूर्य देव ने अपनी परम तपस्वी और तेजस्वी पुत्री सुवरचला को हनुमान जी के साथ विवाह के लिए तैयार कर लिया। उसके बाद हनुमान जी ने अपनी शिक्षा पूरी की । सुवरचला सदा के लिये तपस्या में रत हो गई। 


इस तरह भले ही हनुमान जी शादी के बंधन में बंध गए हो ।लेकिन वह शारीरिक रूप से आज भी बृहमचारी ही हैं। पराशर संहिता में तो लिखा हैं कि सूर्य देव इस विवाह पर यह कहा हैं कि यह विवाह बृहमाणड के कलयाण के लिए हुआ है
Who was suvarchla?
Suvarchla was daughter of sun an wife of Hanuman ji
Who was guru of hanuman ji
Sun 

 महेश चन्द्र कौशिक पिण्डवाडा www.hindidugdugi.blogspot.in

Saturday, May 23, 2015

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु प्रभावशाली दीपक साधना का रहस्य।


क्या आप दीपावली ( Dipawali) को दीपक जलाने का रहस्य जानते हैं?


क्या आप जानते हैं कि दीपावली को लक्ष्मी प्राप्ति व ऋण मुक्ति से क्यों जोडा गया है क्या आप दीपावली मनाते हैं उसके बाद भी आप अगली दीपावली तक लक्ष्मीवान नहीं बन पाते? 
तो यह आलेख आपके लिये है। 
दरअसल दीपावली अमावस्या के दिन आती है जो शनि का दिन होता है हमारे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह की उच्च स्थिती व उनकी कृपा से ही मनुष्य धनवान होता है व मकान बनवा पाता है।इसलिये दीपावली को जो तिल के तेल के दीपक जलाने का रिवाज है वो तेल अमावस्या होने से शनि ग्रह की दशा ठीक करने के लिये जलाया जाता है। 
क्या आप दीपावली को मोमबतियां जलाते हैं? 
दीपावली को सरसों के तेल के दीपक जलाते हैं? 
 सिर्फ इलैक्ट्रोनिक लाईटें लगाते हैं सोचते हैं दीपकों के झंझट में कौन पड़े?
 तो आप गलत कर रहें हैं दीपावली को कम से कम सवा लीटर तिल के तेल के दीपक जलाने से मनुष्य पर चल रही शनि की दशा उतर जाती है तथा वो धनवान व ऋणमुक्त बनता है उसे व्यापार धन्धे में फायदा होता है घर में फिजुलखर्च नहीं होते।  ( Shani shadna to attract money and wealth)
चलिये अबके दीपावली को कम से कम सवा लिटर तिल्ली का तेल ( Sesame Oil) जलावें तथा यदि आप सोच रहें है दीपावली तो बहुत दुर है तो दीपावली के स्थान पर आप किसी भी अमावस्या को तिल के तेल के पांच दीपक जला कर घर की छत पर रख सकते हैं यदि आप यह प्रयोग दीपावली के अलावा अन्य अमावस्या को कर रहें हैं तो सवा लिटर तिल के तेल के दीपक एक साथ जलाना अनिवार्य नहीं है आप पांच दीपक जला सकते हैं उससे भी लाभ होगा।
 तथा कृपया यह भी ध्यान रखें कि सवा लीटर तेल की शर्त न्यूनतम है आप अपनी आस्था व हैसियत के अनुसार जितना ज्यादा तिल के तेल के दिये जलावेगें उतना ही आपको लाभ पहुंचेगा शनि भगवान पर तेल चढाने का भी यहि रहस्य है आप शनिवार को भी तिल के तेल का दीपक (जलाकर) अपने घर के बाहर शनि भगवान के नाम का रख सकते हैं उस दीपक पर सिदुंर का तिलक लगाना ओर भी अच्छा रहता है।( Burn Sesame Oil Deepak With Sindur Marking on Deepak at Every Saturday for Shani Kripa)
 कृपया इस जानकारी को शेयर करके अपने ज्यादा से ज्यादा मित्रों तक आने वाली दीपावली तक पहुंचावें।
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Saturday, June 28, 2014

कब्ज निवारण हेतु इसबगोल का प्रभावशाली तरीके से उपयोग कैसे करें। How to use psyllium husk for management of chronic idiopathic constipation

इसबगोल का छिलका विश्व की सर्वश्रेष्ठ हानिरहित कब्ज निवारक दवा है परन्तु मेरे बहुत से मित्र अनावश्यक रूप से सनाय की दवाईयां या मैग्नीशियम युक्त एैलोपेथिक दवाईयां खा खाकर या तो बवासीर से परेशान रहते हैं या अपनी आांते खराब कर लेते हैं। 
 जब मैं उन्हे इसबगोल का छिलका लेने की सलाह देता हुं तो वो कहते हैं कि इससे उन्हे कोई फायदा नहीं है उन्हे तो तेज सनाय वाली दवा खाने या एैलोपेथिक मिल्क ओफ मैग्नेशिया पीने पर ही पेट साफ होता है। चलिये आज आपको कब्ज निवारण की हानिरहित विधि बताते हैं इससे बवासीर व कब्ज के रोगियों को अपार लाभ होगा।
इसी ब्लोग पर मैने बवासीर का मन्त्र भी बताया हुआ है जिनको बवासीर की ज्यादा प्रोब्लम है वो ये मन्त्र भी करें। यदि आपको इसबगोल लेने से ज्यादा कब्ज हो जाती है या इसबगोल का छिलका आपको लगता है कि आपके कोई फायदा ही नहीं कर रहा तो इसमें आपका ही दोष है क्यों कि आप उसे लेने की सही विधि नहीं जानते हैं जबकि भारत से करोड़ो रूपयों का ये छिलका विदेशों को निर्यात होता है तथा अग्रेंज बेवकुुफ नहीं है कि वो भारत का ये छिलका करोड़ों रूपयों में मंगवाकर खा रहें हैं। 
दरअसल इसबगोल की सही खुराक रात्रि के भोजन के बाद दो पुरे चाय के चम्मच दो गिलास पानी के साथ है। जो दो चम्म्च इसबगोल का छिलका भोजन के बाद पुरे दो गिलास पानी के साथ लेता है उसको तो वो फायदा करता है बाकी में ज्यादा कब्ज करता है। 
आपसे यदि 2 गिलास ( लगभग 500 मिली ) पानी एक साथ नहीं पिया जाता तो कोई बात नहीं पहले एक चम्मच एक गिलास पानी के साथ लेवें उसके 1 घंटे बाद दुसरा चम्मच दुसरे गिलास पानी के साथ लेवें इसके साथ ही आप दुसरी कोई तेज कब्जनिवारक दवा लेते हों तो वो भी आधी मात्रा में पहले दो तीन तक लेवें बाद के दो दिन चौथाई मात्रा में लेवें। 
लगातार पांच दिन तक दो दो चम्मच इसबगोल दो दो गिलास पानी के साथ लिया जाने पर वो अपना असली प्रभाव दिखाने लगता है उसके बाद आपको लगता है कि आपके कभी कब्ज थी ही नहीं ।
उक्त उपाय आजमाने से पहले कृपया अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक या डोक्टर से सलाह अवश्य करें क्यों कि लेखक डॉक्टर नहीं है तथा आपको अन्य कोई बीमारी आंतों में रूकावट सूजन आदि हो तो इस उपाय का प्रयोग डॉक्टर से पुछकर ही करें। 
उपाय के परिणाम से 5 दिन उपयोग करने के बाद ( कृपया 1 दिन में ही निष्कर्ष नही निकाले 5 दिन लगातार उपयोग के बाद ही प्रभावी परिणाम दिखता है) कमेंटस में अवश्य अवगत करावें ताकि अन्य पाठकों का विश्वास बने।लाईक ओर शेयर तो आप करेंगें ही उसके लिये कहने की जरूरत ही नहीं है।
psyllium husk for management of chronic idiopathic constipation

Sunday, December 1, 2013

गर्भवती होने का 100 प्रतिशत कामयाब घरेलु उपचार

पिण्डवाड़ा के आदिवासी क्षेत्र में एक झाड़ फुंक से उपचार करने वाला व्यक्ति गर्भधारण करने की इच्छुक स्त्रीयों को अजवायन पर एक मन्त्र पढकर देता था जिसे ऋतुस्त्राव के तीसरे दिन से रोज रात को आधी आधी चम्मच अजवायन भोजन के बाद लेनी होती थी इस उपचार से स्त्रियों को गर्भ रह जाता था। मैने इस उपचार का परीक्षण किया तो पाया कि वास्तव में इसमें मन्त्र का प्रभाव नहीं है जिन स्त्रियों की शारिरीक संरचना गर्भाशय आदि सामान्य होती है तथा उनके पति में भी शुक्राणु संबधि कोई दोष नहीं होता है उसके बावजुद उनको गर्भ नहीं रहता है तो इसका कारण उनमें पाये जाने वाले हार्मोन की गड़बड़ी से होता है यदि स्त्री हार्मोन का स्तर कम होता है तो शुक्राणु का अण्डाणु से मेल नहीं हो पाता है फलस्वरूप गर्भ नहीं ठहरता है। जो लोग गाय भैसं पालते हैं वो जानते हैं कि जब गाय भैसं हीट में होती है अर्थात उनमें कामवासना प्रचुर होती है तब वो अजीब आवाज निकालती है उस समय उनका नर से मेल करवाने पर उनमें गर्भ रहने की संभावना ज्यादा होती है।
यही इस अजवायन का रहस्य है रात को भोजन के बाद आधा चम्मच अजवायन लेने पर स्त्री में हार्मोन का स्तर बढ जाता है तथा लगभग दो घंटे बाद यह स्तर सबसे ज्यादा होता है उस समय संभोग होने पर स्त्री तत्काल गर्भवती हो सकती है। यह प्रयोग महिलाओं के लिये कामोतेजक भी है जिन महिलाओं में कामवासना कम हो वे भी प्रतिदिन रात के भोजन के बाद आधा चम्मच अजवायन लेवे तो उनमें कामवासना अप्रत्याशित रूप से बढ जाती है। मैने इस प्रयोग की सत्यता की परीक्षा हेतु एक अन्य स्थानीय भोपे ( मन्त्र से उपचार करने वाले को भोपा कहते हैं ) श्री नागबापजी की सहायता ली उनको कहा कि आप अजवायन पर अमुक मन्त्र पढकर गर्भधारण की इच्छुक स्त्रियों को देकर इसकी परीक्षा करें तो श्री नागबापजी ने मुझे बताया कि उन्होने जिन भी स्त्रियों को ऐसी अजवायन दी वो सभी गर्भवती हो गयी। अतः ब्लोग के पाठको से मेरा आग्रह है कि इसे अजमाकर लाभ उठाये व दवाईयों पर अनावश्यक रूपया बर्बाद करने से बचें।इस आलेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि जरूरतमंद को लाभ हो सके।
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Saturday, September 17, 2011

सारस्वत्य मन्त्र

मेरे स्वर्गीय पिता श्री हीरालाल कौशिक जो राजस्थान प्रशासनिक सेवा के एक उच्च अधिकारी थे तन्त्र मन्त्र में विशेष रूची रखते थे सौभाग्य से उनकी हस्तलिखित डायरी जिसमें काफी दुर्लभ मन्त्र लिखें हैं मेरे पास है यद्पि डायरी काफी फटी हुयी है तथा कुछ पृष्ठों की स्याही सिलन से मिट भी गयी है परन्तु उस खजाने से कुछ जनोपयोगी सामग्री में अपने ब्लोग पर डाल सकता हुं।
तो आज उसी खजाने से सारस्वत्य मन्त्र पेश है जिसका अभ्यास आने वाले शारदीय नवरात्रों से विधार्थि व प्रतियोगिता परीक्षा देने वाले कर सकते हैं।
डायरी के अनुसार इसकी केवल एक माला ( 108 जाप) प्रतिदिन करना पर्यापत है।
”ॐ ह्रीं श्रीं वद् वद् वाग्वादिनी भगवती सरस्वति मम विधां देहि देहि स्वाहा”
यहां थोड़ा उच्चारण पर स्पष्ट कर दूं कि संस्कृत में अनुस्वार का उच्चारण म हो ता है अर्थात ह्रीं का उच्चारण हीरिम व श्रीं का उच्चारण श्रीम तथा विधां का उच्चारण विधाम होगा।
यह मन्त्र कितना प्रभावी है मैने कभी उपयोग नहीं किया अतः जो पाठक उपयोग करें वो कृपया कमेंटस में बताने की कृपा करें कि उनको इससे लाभ हुआ 

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